Plant Disease, पादप रोग
पैथोलॉजी या रोग विज्ञान शब्द की उत्पत्ति ग्रीक शब्द पैथॉस (Pathos = disease ) से हुई है जिसका सामान्य अर्थ रोग होता है | वनस्पति विज्ञान की वह भाग, जिसके अंतर्गत रोगों के लक्षण (Symptoms) कारकों (Factors) हेतु विज्ञान (Etiology), रोगजनकों (Pathogens), रोग चक्र (Disease management ) का अध्ययन किया जाता है पादप रोग विज्ञान (Plant pathology = Phytopathology) के नाम से सूचित किया जाता है |
पौधों के जैव क्रियात्मक लक्षणों में होने वाला कोई भी असामान्य परिवर्तन उसके बाह्य आकारिकीय (Morphological), आंतरिक (Anatomical) या प्रक्रियात्मक (Physiological) अनियमितताओं को जन्म देते है तथा इस प्रकार के परिवर्तनों के कारण उत्पन्न होने वाले समेकित प्रभाव को रोग (Disease) कहा जाता है | रोग के कारण या तो पोषक पौधों (Host) की असामयिक मृत्यु हो जाती है या उसके उत्पादों का आर्थिक महत्व हासिल होता है |
पादप रोग विज्ञान के अंतर्गत पादप रोगों के जैविक या अजैविक एवं पर्यावरणीय कारकों (Factors) का अध्ययन किया जाता है | इसमें रोगाणु या रोगजनक (Pathogen) या रोग उत्पन्न करने हेतु सम्पादित कार्यों तथा पोषक (Host Plant) एवं रोगाणुओं (Pathogens) के मध्य होने वाले जैव- रासायनिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है | पादप रोग विज्ञान का मुख्य उद्देश्य रोग के नियंत्रण की विधियों को विकसित करना तथा पौधों में उनके द्वारा होने वाली हानि को नियंत्रित करके कम करना है| पादप रोग विज्ञान का अंतिम लक्ष्य फसलों के रोग प्रतिरोधक जातियों का विकास करना है जो कि रोगजनकों द्वारा संक्रमण के शिकार न हो सके |
हेल्ड (Heald, 1933) के अनुसार "रोग पौधों की उस असामान्य अवस्था को कहते है , जिससे शारीरिक क्रियाओं में किसी भी प्रकार की बाधा अथवा शारीरिक रचना में ऐसे परिवर्तन हो जाते है, जिनके फलस्वरूप पौधों की बढ़वार वृद्धि रुक जाती है अथवा समस्त पादप या उसके किसी भाग की मृत्यु हो जाती है |

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